राह तेरी देख रही जिन्दगी में सदा से समस्या कोई
क्यों खत्म करने हेतू अनेकों व खुदा के सामने रोई
हर समस्या कतार से आने को तेरे सामने बैचैन हैं
अधीर न हो यारो जिन्दगी की समस्यायें खेल मानो
समस्या खत्म करने हेतू तेरी हर चाल कर्म बनती हैं
पछतावेगा उठे हर गलत कदम समस्या बन जावेंगें
हाथ सुकर्मों के, गर हैं तो समस्या विजयी कहलावेंगें
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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