क्यों रहते हो तुम भयभीत तुम यहाँ
हालातों ,इंसानों से या देव दानवों से
क्यों करते हो परवाह समुदाय संसार
खुदा किराये पर चलाने वाले केन्द्रों
या मानवों से, नही बिगाड सकते हैं
गर ये चुनी गई राह तुम्हारी
सही हैं
सारे अवरोध खुदबखुद दूर हो जावेंगें
मानो जो तुम्हारी आत्मा ने
कहीबात
देव दानव कल्पना स्वविचार निर्मित
ये मायावी ठगों की भ्रामक छायायें
हैं
गर कर्म सही हैं, हालात होगें सुखद
राह में बिखरेगी ढेरों पुष्प व फिजायें
पथिक अनजाना
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