Monday, January 13, 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ३८६ - काबिज हुये -- पथिक अनजाना

काबिज हुये जो उनके ख्याल मेरे दिल में
ख्याल मात्र न वह तो कल्पना तुम्हारी हैँ
लिखी गई तखदीर जो खुदा के दरबार में
कर्मों से ही उपजी तकदीर लाये संसार में
अब चेत न कह, किसी ने राह नही बताई
मिले यहाँ दुखोंसमस्याओं ने राह समझाई
नही कह सकता खुदा या गैर कोई हरजाई
कहाँ बेचे फसल वह जो तूने फसल उगाई
पथिक अनजाना


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