मैंने देखा यहाँ कि प्रेमी सदैव मिथ्याभाषी होते है
मेंने जाना कि प्रेमी सदैव विचारक भी होते हैं
चौकन्ने निर्भिक एकान्तप्रियभी प्रेमी ही होते हैं
शातिर चालबाज जिज्ञासु व खोजी निगाहों वाले
अपनासर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर प्रेमी हैं
रहस्यमयी व्यक्तित्व व धार्मिक भी हो जाते हैं
कवि हृदय व कठोर कुंठित स्वभावी होते प्रेमी
कद्रदान ऐसे हुये दिल अधीन तो उम्र मूल्यहीन
जिनमें नजर आवें ये तमाम लक्षण दर्शाये मैंने
निश्चित मानो कि वह तो प्रेम रोगग्रस्त हो गये
नही राह न यकीन बच जाने की पाले कोई आस
निदान धन्वतरी या कोई चिकित्सक न कर सके
मनोवैज्ञानिक हारे, खुदा न इस पर कभी विचारे
सुकर्म-दुष्कर्म की सीमायें लांघ राहमुहब्बत संवारे
हारे तो गम नही, रहेगी कहानी जिन्दा, हम नही
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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