यार मेरे कहते भाग्यशाली हो
विशाल शहर जनसमूह में हो
दर्द मेरा कि सागर करीब रह
कर भी गागर मेरी खाली रह गई
देश विदेश
का हर खास आता हैं
यहाँ
धन-तन-मन-जन देख पाता
नही मिले मेरे हाथ सही राह से
न दुनिया मुझे अपना कह गई
ब्लाग -- राह ए जिन्दगी (https://www.blogger.com/home)
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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