हृद्य मेंप्रश्न
जागता बार बार हैं यह क्यों
विभिन्नता
मौजूद होती इंसानी विचारों में
नही एहसास
ऐसा मैंने पाया अन्यत्र कही
जमी पर
शारीरिक मूल ढाँचे सब एक जैसे
क्यों मिले
खुशी इंसा को कही किनारों में
देखा हालात
पनपने पलने के होते एक से
फिर भी
संतानों के विचार सोच भिन्न है
जान न पाये
अन्य योनियों में यह अन्तर
प्रश्न
अनुत्तर हैं खेलते कर्म जन्तर मन्तर
ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
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