खुद का विवाह करके क्या इंसान जीवन चैन खोता हैं ?
वही अपनी पुत्री का विवाह करके क्या पिता रोता हैं ?
विवाह अपने पुत्र का करता तब चुप क्यों हो जाता हैं ?
न समझें फिर इंसान संतान को किस रूप में लेता हैं ?
खोज खोज न जाना खुशियों का बादल कब बरसता हैं ?
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
ब्लाग - राह –ए ---
जिन्दगी
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