Wednesday, October 23, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३०४ -जफ्फियों की लहलहाती फसल सतनाम सिंह साहनी

हर जफ्फी के पीछे इक दर्द इक
कहानी इक तूफान छिपा होता हैं
गजब है कि चाहे दर्द का तूफान हो
या कहानी में ठंडक का एहसास हो
जफ्फी का रजामंदी से लेनदेन हो
या जबरन एक पक्ष कुछ खो जाता हैं
खोने की खुशी इतनी होती हैं कि
जफ्फी की यादें ताउम्र साथ  हैं
जिन्दगी में जफ्फी में लिया हो
गर तो बदनसीब तुम सा कोई नही
खूंखार सैनिक या मस्त कवि जफ्फी
ने ही सबकी किस्मत धोई हैं
मिलती सफलता की जफ्फी
सदा अकेले में इंसान को हैं
जफ्फी असफलता की इंसा को
जगजाहिर कर बदनाम कराती हैं
दौलत दरकिनार  मांग खुदा से
जफ्फियों की लहलहाती फसल यार
तूफानों श्मशानी कहकहों भंवरजालों
भरे जीवन में शांति जफ्फी देता हैं
नही जरूरी कि वासनामयी जफ्फी
ही शांति इंसान को दे सकता हैं
जफ्फी तो जफ्फी हैं यह चरित्र
आपका जो कैसा महसूस करता हैं
बोतल हो या गिलास रहते वे साथ
शराब के पर शराबी नही होते हैं
ब्लाग -  राह –ए --- जिन्दगी


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