हर दिल कुछ कहता चाहता व करना भी चाहता है
मगर हर पल किसी खौफ से खुद में सिमटा रहता हैं
बातें बडी मनमोहक करता स्वरूप आडम्बरी धरता हैं
ख्यालों उडानों में खो खुद को खुद से भी दूर करता हैं
रहे दूर पर गर्व सदा हर मुकाम पर खुद पर करता हैं
अनुभवी विव्दनों ने हकीकत बताई राहअपनी चलता
खौफ बेराह के परिणामों का रहे दुराह क्यों चाहता हैं
सतनाम सिंह
साहनी ( पथिक अनजाना
)
ब्लाग -- राह –ए --
जिन्दगी
TRUE-ASHOK
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