मेरे विचारों से जो कहते हम यह करेंगें वह नासमझ हैं
जो कहते भारतीय ज्योतिष्य मिथ्या वह नासमझ हैं
सुकर्मों को बुजुर्गों ने काल्पनिक ईश्वरीय रूप दिया हैं
जागें वर्तमान सुकर्मों से भविष्य आपका सुधर सकता हैं
सुकर्म बदल सकते पूजा व्रत दान नही बदल सकते हैं
खुदा के व्यापारी दुकान चलाने हेतू कहानियाँ कहते हैं
अंह आडम्बर मोह घातक मित्र हैं सुकर्म पार करते हैं
सतनाम सिंह
साहनी ( पथिक अनजाना
)
ब्लाग -- राह –ए --
जिन्दगी
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