Tuesday, October 29, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३१०---चाहे तुम कितनी भी करो ---- पथिक अनजाना



चाहे तुम कितनी भी करो कोशिशें
पर मिलनी कामयाबी मुश्किल हैँ
समय से लेते सहारा सुकर्मों का
न होने वाला काम बन जाता हैँ
करते कर्म ध्यान स्वार्थ पर होता
तभी इंसा सुखद भविष्य खोता हैं
ब्लाग --  राह –ए --- जिन्दगी
सतनाम सिंह साहनी ( पथिक अनजाना 

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