Thursday, October 31, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३१२-- -- दयालुता दोस्ती का बीज हैं ---सतनाम सिंह साहनी पथिकअनजाना


माना कि दयालुता दोस्ती का बीज हैं गर
तूने फसल दोस्ती की लगाई होती कभी तो
 करके ऐसा निर्णय तूने  बढाया फासला
प्यार के महकते फूलों से भरी बगिया होती
दयालुता इतनी नही कि निर्भर हो जाये
दयालुता ऐसी न तुम्हारी मूंछें ऐठं जाये
नजर दोस्ती की वह हमसफर बन जाये
ब्लाग --  राह  --ए --  जिन्दगी
सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)


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