माना कि दयालुता दोस्ती का बीज हैं अगर
तूने फसल दोस्ती की लगाई होती कभी तो
न करके ऐसा निर्णय तूने बढाया फासला
प्यार के महकते फूलों से भरी बगिया होती
दयालुता इतनी नही कि
निर्भर हो जाये
दयालुता ऐसी न तुम्हारी
मूंछें ऐठं जाये
नजर दोस्ती की वह
हमसफर बन जाये
ब्लाग -- राह --ए --
जिन्दगी
सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)
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