Thursday, December 12, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३५४ - खासियतें क्या --- पथिक अनजाना

मेरे रहनुमां की खासियतें क्या हो
यह मेरी समझ से परे होती क्यों हैं
मेरे हमराहियों की खासियतें क्या हो
यह मेरी समझ से परे होती क्यों हैं
उम्र के अन्तिमपडाव पर जा पहुंचा हू
समझा क्या मेरा तेरा यहाँ क्यों हैं
मंजिल गुरु हमराहियों को न जाना हैं
जान सका मेरी चाह क्या व क्यों हैं
न समझा मैंने यहाँ सीखा पढा क्या है
कहते संसार ज्ञान भंडार ज्ञानी भरमार
मुझे लगता मैने व्यर्थ समय गुजारा हैं
हंसता ब्लागों पर ज्ञान बाँटता नित्य हूं
जबकि न ज्ञान न ज्ञानी न कुछ विचारा
कितना मूर्ख साबित हुआ पथिक बंजारा

- ब्लाग --  राह   जिन्दगी

पथिक अनजाना

यदि अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें

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