मैंने सुना कहा रजनीशजी
ने था कभी
बात यह कि इंसान
यहाँ जो बोलता हैं
वह दूर कहीं किसी
पथरीली चट्टान से
टकरा अमिट छाप
अपनी छोड देता हैं
मनुष्य ने भविष्य
में कभी चट्टानों पर
अंकित छापों को पढसमझ
जान लिया
कर विश्लेषण
भावीविद्धान विचारेंगें गर
उल्लेखों का उचित
अर्थ पहचान लिया
जैसे आज के
विद्धान गहरे ब्रम्हाण्ड की
हर जाहिर या छिपी
सही जानकारी को
जानने का प्रयास
करने में सफल हुये
विभिन्न क्षेत्रों
की छान खाक व बिखरे
तथ्यों को सफल
एकत्रित किया निश्चिंत
क्रमबद्ध लेख पर
महिनों जा विचार किया
जानके पूर्वजों के
नाम खुरेचेगें ख्याल वह
शोधविषय मानवीय
हृदय सीमा में लाखों
मंडराते झंझावात
के रूप देख इनके दृष्टि
विचार व्यवहार
छिपी आशाओं की शाखायै
एक ही मांग की हैं
कि येनकेन प्रकारेण
धनसंग्रह विलासिता
सुन समझ पा विचार
उफ करे अहिल्या
मां वह जो युगों से ले
शिलारूप ले
प्रतीक्षारत हैं राम की, त्याग
प्रतीक्षापीडा साथ
निरन्तर उन्हें बदली हुई
इंसानी विचार भंवरों
में फंसना होगा क्या
भूमि तपोभूमि व
देवविचरण क्षेत्र मान्य
गर ऐसी सिद्ध भूमि
पर राक्षस क्यों आते
पथिक अनजाना
(सतनाम सिंह साहनी)
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