खुदाया कैसे हालात बना दिये तूने स्वर्गीय जहान के
न यकीं यहाँ हकीम का न रखते यकीं न हाकम पर
न यकीं यहाँ समाजिक रहनुमाओं का न यकीं दमपर
नही यकीं उन पर जो लगाते तेरा दरबार थे जहान में
न यकीन वकील पर न रखते यकी इंसानी कानून पर
न हद औलाद की होती वक्तियाँ हालातों स्वार्थों में बंधे
सभी हवस व बंधनों में बंध गुलाम हुये किसी शैतान के
किस बात की प्रतिक्षा हेतू बनाये हालात ऐसे जहान के
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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