Saturday, November 9, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३२१ -खुदा को याद करके भी -----सतनाम सिंह साहनी

खुदा याद करके भी कभी भी हम खुदा के न हुये
इंतजार हो न सका सोचा देखें यहाँ क्या हैं रखा
जिन्दगी बरबाद कर हम जिन्दगी के न हो सके
देख खासियतें जमाने की सपने चूर चूर हो गये
क्यों लाश जिन्दगी ढोने के लिये मजबूर हो गये
ब्लाग  ---  राह  ---ए - जिन्दगी

पथिक अनजाना

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