जब कहीं किन्हीं मानवीय वार्तालाप को कहीं मोडना हो
तब विषय को तुम तकदीर की लकीरों की देन
कहते हो
रूकता वाद विवाद वक्त बर्बाद होने से रूक
ही जाता हैं
मलहम लगाने हेतू कुछ मजबूरियों का नाम उसे
देते हो
संबंधों हेतू किसी को कसूरवार का खिताब क्यों
देते हो
ब्लाग
--- राह –ए --- जिन्दगी
पथिक
अनजाना
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