संसार में सब
किसी न किसी रूप म़ें जुडे न कोई जुदा
हर पल अवकाश
पर नही संसार ,प्रकृति व न खुदा हैं
दृश्यवान अदृश्यवान संसार में यद्यपि सब मेहमां हैं
कहानी बोतल
जिन्न जैसी रहे न अवकाश पर इंसा हैं
अवकाशी बैताल
या इंसा कयानत के लिये महाकाल हैं
ब्लाग - राह –ए ---
जिन्दगी
सतनाम
सिंह साहनी ( पथिक
अनजाना )
No comments:
Post a Comment