Tuesday, October 22, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३०३-संसार मे सब किसीन किसी---सतनाम सिंह साहनी

संसार में सब किसी न किसी रूप म़ें जुडे न कोई जुदा
हर पल अवकाश पर नही संसार ,प्रकृति व न खुदा हैं
दृश्यवान  अदृश्यवान संसार में यद्यपि सब मेहमां हैं
कहानी बोतल जिन्न जैसी रहे न अवकाश पर इंसा हैं
अवकाशी बैताल या इंसा कयानत के लिये महाकाल हैं
ब्लाग -  राह –ए --- जिन्दगी

    सतनाम सिंह साहनी       ( पथिक अनजाना )

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