Monday, October 21, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३०२---जब बिल्लीयाँ सयानी हो ---पथिक अनजाना

जब बिल्लीयाँ सयानी हो
पूर्णतः होश खो दीवाने होवे
भलाई इसी में घर मालिक की
बैठे किनारे हो शांत देखता रहे
न किसी बिल्ली बिल्ले को दे
एहमियत न किसी को पुचकारे
बस वह अपने आंख कान खुले
रखें सदैव डाले जुबान पर ताले
आप अपनी घी रोटी सेंकनें में
हो मस्त बन जावे वह मतवारे
मालिक अब नही हाथ आपके
क्यों होते बेइज्जत बीच बजारे
पथिक   अनजाना
ब्लाग -  राह –ए --- जिन्दगी
    सतनाम सिंह साहनी       ( पथिक अनजाना )


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