गमों से भरे इंसानों को क्यों गम अपने सुनाते हो
कर गम अपनी शायरी में जाहिर बेपर्दा हो जाते हो
खुदा के कानून तहत दो सजायें साथ भुगत रहे हो
पहली जामा इंसानी दूजी जंगे जिन्दगी कर रहे हो
ब्लाग -- राह –ए --
जिन्दगी
पथिक अनजाना
सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना के नाम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते हैं की कुछ रचनायें इस संग्रह में संग्रहित हैं विचार किसी की भर्त्सना उपहास नही हैं https://pathicaanjana777.blogspot.com
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