Sunday, November 17, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ३२९ - गमों से भरे ---- पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)

गमों से भरे इंसानों को क्यों गम अपने सुनाते हो
कर गम अपनी शायरी में जाहिर बेपर्दा हो जाते हो
खुदा के कानून तहत दो सजायें साथ भुगत रहे हो
पहली जामा इंसानी दूजी जंगे जिन्दगी कर रहे हो
ब्लाग --  राह –ए -- जिन्दगी

पथिक  अनजाना

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