Wednesday, November 20, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक - ३३२ - फैसला सफल जीवन का --- पथिकअनजाना

फैसला सफल जीवन का इस पर हीनिर्भर होता हैं
इंसानी जिन्दगी यहाँ आपने किस तरह से गुजारी
इंसानी सफल जिन्दगी वही यहाँ कहला सकती हैं
जिसने चल सुराह संतुलित हो मर्जी से गुजारी हो
न अंध मूक बधिर बन हर सांस उसने विचारी हो
चुने साथ अपने भला सबके देखने की बीमारी हो
सुकर्मों के सिवा नही उपस्थिति अन्यत्र तुम्हारी हो
ब्लाग --  राह –ए – जिन्दगी

पथिक अनजाना

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