Friday, November 22, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३३४ - मेरे दोस्त हालातों के --- पथिक अनजाना

   अभिव्यक्ति  क्रमांक -  ३३४ - मेरे दोस्त हालातों के  ---पथिक अनजाना              

मेरे दोस्त हालातों के अनूकूल हो जाने के लिये
आप बस हालातों के पीछे जाकर खडे हो जाइये
सामने से हालात आपको भयावने नजर आते हैं
पीछे मुड देखें हालात खुद ही बेनकाब हो जातेहैं
अनूकूल करना हालातों को कठिन हो सकता हैं
हंसते हुये गुजरे हालातों से कुछ कठिन नही हैं
जिन्दगी हो जीनी खुद के सामने खडे हो जाईये
गर खडे खुद के पीछे तो तनावी जिन्दगी पाईये
स्वंय की गलतियाँ सामने होकर खडे गिनाईये
सदा पदचिन्हों पर चल आप सियार कहलाईये
ब्लाग --  राह  ए जिन्दगी
पथिक अनजाना


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