दुनिया को सदा से आमन्त्रण देती यह नंगी बाहें व राहें हैँ
कुपथ पर दुनिया को ले जाने को तैयार यह अजब चाहें हैँ
गहरी झील में डूबोने कोआतुर यह मदमयी बुलाती आँखें हैँ
नंगी पीठ नंगा पेट लपलपाती जिव्हा येकैसी रची बीमारी हैँ
डूबने को दुनिया तैयार, होती न कभी दुनिया से तोइंकारी हैं
ये बाहें मेरे देश में न भाती किनारे न वृक्ष राह नंगी
कहलाती
वक्त निगाहों में देशवासियों को कुराह ले जाने की तैयारी
हैं
पथिक अनजाना
ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
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