इंसान पहली सीख को हासिल करता मां बाप से हैं
दूजी सीख को पाता अपने सामाजिक संस्कारों से हैं
तीजी सीख मिले वो हासिल करे अपने सहोदरों से
चौथी सीख पाता साथ की युवा पीढियों व हालातों से
पंचम सीख के लिये मांग व हालत मजबूर करते हैं
छटवीं सीख में कर्ता हो संपूर्ण चैन अपना खोता हैं
सातवीं सीख पाने इंसा शांति छोड तानाशाह हो जाता
अष्टम सीख उसे पुत्र पुत्रियाँ व्याहने पर मिल जाती हैं
अन्तिम सीख में बहुयें जो खिलावें बतावें भाग्य भोगा
ब्लागिंग में वक्त बीता इंतजार मौत का करना होगा
जग में बटोरा जग को देसुकर्म यादगार बन जावेगें
गुजरे
राह से अनेकों सब नही स्मारक बना पायेंगें
ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
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