Monday, December 2, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३४४ - छोटी राह चुनने का लोभ == पथिकअनजाना

जीवन में छोटी राह चुनने का लोभ न करना
माना कि वह राह सबसे ही अलहदा होती हैं
इस राह में हर पग अवरोध हैं नही मोती हैं
माना  राह सदैव  अलग  अपनाने वाला ही 
इस दुनिया में अपना नाम अमर कर जाता
प्रश्न  नाम  अमरता का न रहे तेरे  सामने
लोग नाम राम के साथ रावण याद करते हैं
याद रहती  संख्या आंसू पौछने की होती हैं
याद हमसफरों को साथ चला क्या मोती हैं
मिटती हस्तियाँ  पर यादें कभी न खोती हैं
 ऐसा राही निर्माता मंजिल व नाम पाता हैं
याद करे भविष्य मैं अनजाना कहलाता हू

- ब्लाग --  राह  जिन्दगी

पथिक अनजाना
यदि अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें



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