Tuesday, December 24, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३६६ – हंसी आती ऐसी --- पथिकअनजाना

हंसी आती ऐसी सुशिक्षित चतुर युवा नारी पर
जो शीघ्रातिशीघ्र बटोर रही हैं भौतिकता धन
ख्याल से गर जीवनसाथी स्वर्गीय हो गया तब
संपन्न हो,बना मासूम चेहरा गर्दन ऊंची पावेंगी
हंसें आप, महान नारी धन्य अबला कहलावेगी
वस्तुत: चरित्र मानवीय शोध का गहन विषयहै
नारी तो इक अंग समूचा इंसा समझ से परे हैं
इंसान, खुदा, ब्रम्हाण्ड, भविष्य की थाह नही हैं
रखते सब जानने की चाह निश्चित राह नही हैं

पथिक अनजाना ( सतनाम  सिंह  साहनी)

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