Wednesday, December 25, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३६७ - भुला नही पाते --- पथिकअनजाना

भुला न पाते हम नाम यारों का दिलोदिमाग से
माया छाया में आप,जीवन धूप में हम देते थाप
हम रहे चलते सदा धूप- छांव में हरेक राह पर
खोजते रहे राह आप अपनी ही अनेकों चाह पर
जूझे आप कुछ और कुछ --,जूझे हम भाग्य से
धिक्कारता हैं दिलेनादाँ खेले क्यों तुम आग से
लोग कहते हम दीन व दुनिया से दूर हो गये हैं
न समझे दिल यह चर्चें क्यों मशहूर हो गये हैं

पथिक अनजाना ( सतनाम  सिंह  साहनी)

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