Friday, December 27, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३६९ – इंसानी गहन यादों में -- पथिक अनजाना

इंसानी गहन यादों में जाने क्यों दो का सदैव  वास रहता हैं
किसी व्दारा किया बुरा,माँ हाथों निर्मित खाना आबाद रहता
उथली यादों में बसता परिवार, यार, भविष्य  फिर संसार हैं
जुबां पर मौजूद पर नही रहते इसके दिल में सुकर्म विचार हैं
मुश्किल  लदे  इन अतिक्रमणकारियों से बचना इंसान का हैं
कहे सुने  खुदाई बातें, फिर क्यों पथप्रदर्शक इसका हैवान हैं
ताउम्र युद्धग्रस्त रह यह लेता सांसें खोजता जीने की वजह हैं
कहे पथिक अनजाना साक्षी बनोगे तो लोगे सुखों का मजा हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम  सिंह  साहनी)


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