Saturday, December 28, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३७० - पाने को थोडी सी खुशी के या ---- पथिक अनजाना

पाने को थोडी सी खुशी के या मुस्कान भरे चन्द लम्हे
पाने को झूठा प्रोत्साहन झूठी वाहवाही व झूठा सम्मान
कुछ सपने व अरमान आशायें मुस्कानें व अभिलाषायें
अपनों  व गैरों की जिन्दगी के कीमती लम्हें दफनाते हैं
चेहरे अपने मढते, आडम्बरी मुस्कान शांति  व हंसी से
खोकर साथियों की मुस्कानें उनके जीवन से जीना व्यर्थ
उनकी खुशियों के महल में आशाऔ की रोशनी न बुझाये
गर रोशन ,संगीतमयी होगा उनका महल निश्चित मानें
नष्ट कष्ट, यार दुखमयी अतीत कहानी तू गुजरी पायेगा
मुस्कानें बाँटे जितनी, अनेक सदगुणा पा नायक होजावेगा

पथिक अनजाना ( सतनाम  सिंह  साहनी)

No comments:

Post a Comment