पाने को थोडी सी खुशी के या मुस्कान भरे चन्द लम्हे
पाने को झूठा प्रोत्साहन झूठी वाहवाही व झूठा सम्मान
कुछ सपने व अरमान आशायें मुस्कानें व अभिलाषायें
अपनों व गैरों की जिन्दगी के कीमती लम्हें दफनाते हैं
चेहरे अपने मढते, आडम्बरी मुस्कान शांति व हंसी से
खोकर साथियों की मुस्कानें उनके जीवन से जीना व्यर्थ
उनकी खुशियों के महल में आशाऔ की रोशनी न बुझाये
गर रोशन ,संगीतमयी होगा उनका महल निश्चित मानें
नष्ट कष्ट, यार दुखमयी अतीत कहानी तू गुजरी पायेगा
मुस्कानें बाँटे जितनी, अनेक सदगुणा पा नायक होजावेगा
पथिक अनजाना ( सतनाम
सिंह साहनी)
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