Sunday, December 29, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ३७१ - पुरूष प्रायः जो दिल में -- पथिक अनजाना

पुरूष प्रायः जो दिल में होता वह प्राय: प्रकट करते
स्त्रियाँ प्रायः जो दिल में होता नही प्रकट करती हैं
अनिवार्य है कि किसी नारी को पहचानने हेतू सदैव
कहे शब्दों के अर्थ व उसकी मनोभावना कोपढ जायें
आकाटय सत्य पायेंगें आप कि अन्तर बहुत होता हैं
यह जितनी जमीन ऊपर होती कई गुना अन्दर होती
बिन बोले आकर्षित करती, कर राज अबला कहलाती

चाहे दोषी स्त्री हो पर बेचारे पुरूष की शामत आती हैं

No comments:

Post a Comment