नही समझते उम्र के अन्तिम
इस पडाव में हम आकर अब
जीवन भर का निचोड जो कि
हम लिखते क्यों जाते रहते हैं
न पढने की इच्छा देखी कहीं
नमालुम यह किस काम आवेंगें
मेरी सारी मेहनत के क्या पुष्प
बदनसीबरूपेण याद किये जावेंगें
न अग्निदाह न जलप्रवाह होगा
ख्यालों की मजार
यह कहलावेंगें
क्या मेरे समान लेख मेरे लेख
खिताब व्यर्थ का शीर्षक पावेंगें
- ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
यदि अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया
अग्रेषित करें
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