जानते हो ए खुदा जिन्दगी का हमारी
कुछ
गर कहीं है तो नही तुझसे कभी छिपा हैं
जानते हो ए खुदा हमारी इच्छा ही जाकर
व्यवहार में तब्दील हो तो जाया करती हैं
न देख पाया तुझे किसी ने कभी कही भी
लोग जोडते सुख-दु:ख सदा तेरे नाम से हैं
मानो दो ही न्यायाधीशों को वे तो जानतेहैं
इक यहाँ सशरीर दूजा नाम जाना जाता हैं
लोगों की गढी गई कहानियाँ को सुनकर के
बेचारे इंसान पर
मानो अंकुश लगा रहता हें
सुना तू दयालु,सम्हालु,सवालु राह भीदिखाता
न जानू लोगों को राह चलना क्यों न आताहैं
- ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
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