कहा जाता यह कि अपने प्यार को
बाँटने की खातिर यार कभी भीतुम
कभी किसी की
परीक्षा न लो न ही
मापदण्ड पात्र का कभी भी बनानाहैं
सब को एक ही स्तर व एक सीमा
एक दृष्टिकोण से बाँटोगे यार गर
न कोई ऐसा होगा
कहना पडे जिसे
अपना पराया न ऐसा न वैसा
होगा
हाल,उपलब्धियाँ अपनी अपनी होती
आवश्यकतायें,विचार,यार अपने होते
राहें अपनी व ख्यालों के सपने अपने
वक्त धार में बहो साहिल अपने नही
साहिल वहीं रहेंगें, तुम न वहाँ रहोगे
- ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
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