Saturday, December 7, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक— ३४९ --- मापदण्ड पात्र का कभी न बनाना हैं –पथिकअनजाना

कहा जाता यह कि अपने प्यार को
बाँटने की खातिर यार कभी भीतुम
कभी किसी की परीक्षा न लो न ही
मापदण्ड पात्र का कभी भी बनानाहैं
सब को एक ही स्तर व एक सीमा
एक दृष्टिकोण से बाँटोगे  यार गर
कोई ऐसा होगा कहना पडे जिसे
अपना पराया ऐसा वैसा होगा
हाल,उपलब्धियाँ अपनी अपनी होती
आवश्यकतायें,विचार,यार अपने होते
राहें अपनी व ख्यालों के सपने अपने
वक्त धार में बहो साहिल अपने नही
साहिल वहीं रहेंगें, तुम न वहाँ रहोगे

- ब्लाग --  राह   जिन्दगी

पथिक अनजाना
यदि अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
https://pathicaanjana777.blogspot.com

No comments:

Post a Comment