Sunday, December 8, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ३५० – जीवन गुजारते गुलाम ---- पथिक अनजाना

संतानों को जो उठाने भार जोखिमों कार्यों से बचाते रहते हैं
इतिहास में उन्हें संतान का दुश्मन नाम का पुरुस्कार देते हैं
ऐसी संतानें ताउम्र क्रमशः परनिर्भर होकर गुलाम हो जाती हैं
ऐसे गुलाम कभी दुनिया के रंगमंच पर बादशाह बनती हैं
चाहे नगर हो या जंगल वह कब्रिस्तानी बादशाह कहलाती हैं
सारी जिन्दगी वे गुलाम रह गुजारते गुलाम रह मर जाते हैं
पथिक अनजाना

- ब्लाग --  राह   जिन्दगी

यदि अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
https://pathicaanjana777.blogspot.com

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