दोस्तों बदकिस्मती, खुशकिस्मती को मैं न कभी मानता हू
कुछ खासियतें मिली फूलों को हैं जो कांटों में भी जी लेते
हैं
मानाकि खुशकिस्मती मे जीने का आनन्द कुछ और होता हैं
वक्त के दरिया में उठे तूफानों से लडने का आनन्द कुछ और
दो दिन की जिन्दगी जीनी हो या सदियों में गुजरे सफर यहाँ
इक कदम गर शौक से उठाया खोजते रहते जिन्दगी गई कहाँ
खुशियों की हो रही जहाँ वर्षा,वहाँ वर्षा में भी घर जल जाते
हैं
जिन्दगी साथ रह कर बरसों भी जाने क्यों दगा दे ही जाती हैं
मौत से भागते रहे ताउम्र पर, जाने क्यों साथिन बन जाती हैं
हर पल कांपे जीवनभूमि समस्याओं से क्यों अपनी हो जाती हैं
गर न विचारों किस्मतों को तो वह राह पथिक की कहलाती हैं
- ब्लाग -- राह ए जिन्दगी
पथिक अनजाना
यदि
अभिव्यक्ति को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
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