जो गिरता राह में वही जो चलने वाले को मान दे पाता हैं
जो गिरा तो न उठा वह चलने वालों का नेता न बन पाता
जो गिरता व उठता रहे वो चलने वालों का आदर्श बनता हैं
जो सांसैं सदा छांव में लेवे वो आन्नद धूप का कहाँ पाता हैं
न धूपछांव न राह किनारे की फैली छटाओ से जो जुडे कभी
राही सब हैं जीवन राह के पर, यह अनजाना कहलाते तभी
पथिक अनजाना (
सतनाम सिंह साहनी)
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