Saturday, January 4, 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ३७७ - माना कि एक ही गलती ---- पथिक अनजाना

माना कि एक ही गलती बार बार हो इंसान से
इंसा उससे  गहरी व स्थायी सीख पा जाता हैं
कोई गलतियाँ करे जब बारबार इंसा विभिन्न
उसकी गलतियों पर गैर पर्दा डालता  रहजावे
हानिप्रद ये न केवल पर्दा करने वाले के लिये हैं
गलत इंसान उसके अपने व समाज भी भोगता 
भविष्य के बोये कर्मबीज तब सुखों को लोचता
सिखाया अनेकों ने पर तत्कालिक हित सोचता
नही अर्थ आज जीने का पीडित अनेकों को करो
नही अर्थ भविष्य हेतू जीने का आज बैचैन रहो
लक्ष्य मात्र सुकर्म, हर काल जीवित रह जावोगे
लोग चाहे जुटे करीब या न, तुम न लूटे जावोगे
पथिक  अनजाना(सतनाम सिंह साहनी)


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