Sunday, January 5, 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ३७८ - PRE--SIT ? IN WHICH LIFE ? - - पथिक अनजाना

दूर किसी अनजाने मुकाम से मुस्कराते हुए कोई यार मेरे
be positive with life का संदेश हमें भेज दिया करते हैं
जबकि मुझे तो यहाँ हर ओर होता व्यापार नजर आता हैं
खुदा को न दूर रखा अभयदान बदले स्मरण,सेवा देता हैं
इन हालातों में जिन्दगी pre.?—sit? in—which life. हैं?
कैसा जीवन कैसी मुक्ति इस बाजार मे क्यों हम आते हैं
सांस का एक स्वर गर व्यापारी तो दूजा संघर्षी बीताते हैं
be positive संदेश इस जिन्दगी में दीवालों पर लगाते हैं
भ्रम यारों को मानवीय समस्याओं को कंबलरूप लपेटा हैं
समस्याओं को सरल रूप से ले व विचारों को तरलरूप मैं
होता यह समस्याओ को जीवनमरण का प्रश्न बना लेते हैं
विचार- व्यवहार प्रश्न जीवनमरण का आडम्बरी सजा लेते
माफ करें दोस्त सच्चाई ,मजाक की चाशनी में डुबा देते है
पथिक  अनजाना


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