Monday, January 6, 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ३७९ - यह नही सही कि ------ पथिक अनजाना

यह नही सही कि मंथन विचार करके फैसला
हर इंसा अपने विवेक से हो निष्पक्ष करता हैँ
सत्य यह हैँ कि वक्तियाँ हालात से हो मजबूर
विचारों स्वार्थों का भार फैसले पर हावी होताहैँ
भूल जाता बेचारा कि क्या खोता क्या पाता हैं
कहानी शुरू कर्मों की जोबोता काट ले जाता हैं
बेसब्रा, बेखबरा हो वह बेवफा कृति कहलाता हैं
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


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