Tuesday, January 7, 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ३८० -- करीबी जो भी पतियों के -- पथिक अनजाना

करीबी जो भी पतियों के होते हैं पुरुष हो या नारी
पत्नियाँ उनसे नफरत करे नही जावे यह बिमारी
करीबी जो भी पत्नियों के होते है पुरूष हो या नारी
गर नारीतो बहानों से बढावे मेलजोल पति दुखियारी
गर पता चले पत्नी करीबी मर्द तो नफरत हो भारी
कैसी यह विडम्बना जो नही जाती खुदा से विचारी
पथिक अनजाना (पथिकअनजाना)


No comments:

Post a Comment