नारियाँ पुरूषों की मनोस्थिति क्रियाओ
को पढने समझने में प्रयासरत
रहती है
पुरूष नारियों के नियंत्रण में जाकर के
मुस्कानी मरूस्थल में भटक तो जाता है
देखा कुछ नारियाँ मनीस्थिति पढती हैं
मनोस्थिति व मनीस्थिति में अन्तर हैं
कुछ पुरूष नारी की पढते हैं मजबूरियाँ
ताउम्र पढने समझने के बाद भी दोनों
विडंबना इक-दूजे की तह न जा पाते
बहुत कम है जो पति पत्नी निशंकरूप
बाहरभीतर स्पष्ट एक हो जीवन बिताते
मानवीय अध्ययन आनन्दित करता हैं
पथिकअनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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