Monday, November 4, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३१६--- कुछ आकर यहाँ मस्ती === सतनाम सिंह साहनी



कुछ आकर यहाँ मस्ती दुनियायी रंगीनियों में खोजते हैं
कुछ आकर वासना में डूबे रहते हर नारी शरीर तौलते हैं
कुछ हो बेखबर सदैव प्रश्नों के हल दुनिया में खोजते हैं
कुछ बेखबर सृष्टि रचना सौन्दर्य व व्यवहार में खोते हैं
कुछ घुंघरूऔं की खनक संगीत यंत्रों की थापों में मग्न हैं
कुछ बटोरते धन धातुयें संपति व गुलाम व खुद जुडते हैं
कुछ आ नाम मान की पद यश की सीढियाँ जा चढते हैं
कुछ अतीत व वर्तमान के गलियारों में भटक राहें जोडते हैं
कुछ आ मोहरों धरोहरों ग्रन्थों को नित्य मसलते अंगुलियाँ
कुछ येनकेन प्रकारेण चाहतें छीनने में आन्नदित होजाते हैं
कुछ किसी अनदेखी शक्ति के चमत्कार घटित बाट जोहते
कुछ आ दैत्य परिभाषित कुकृत्यों में शामिल हो हीजाते हैं
कुछ आ फर्जों से घबरा शरण वनों व पर्वतों में खोजते हैं
कुछ न सोते रोते बोते खोते वह मस्त ख्यालों में होते हैं
निर्माता एक रूप अनेक लेख भिन्न इंसा इंसा नही होते हैं
हैरां पथिक अनजाना खोजते कहाँ पनाह जीवन कैसे खोते
ब्लाग -  राह –ए ---  जिन्दगी
सतनाम सिंह साहनी ( पथिकअनजाना)





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