Tuesday, November 5, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक --३१७---सागर में डुबो दो — पथिकअनजाना


जिन्दगी  को यारों के सागर में डुबो दो लोग ये कहते हैं
जीवन में आशापूर्ण विचार अपनायें सब मुझे ही कहते हैं
यह बात सदैव मुझे किताबी व प्रदर्शनीय क्यों लगती हैं
झांको गर इनके दिलों में कहानी कुछ और ही चलती हैं
सपनों अपनों हालातों से विवश सोच कही  जा ढलती हैं
ब्लाग   --   राह –ए ---  जिन्दगी

सतनाम सिंह साहनी  (पथिकअनजाना)

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