मित्र जब कभी स्वंय को तुम अकेला पाने लगते हो
न करो
दरखास खुदा से कि
वे बदले तकदीर तुम्हारी
दोस्तों अपनों की
नजर से
तुम हल को देख पाते हो
ब्लाग --- राह ---ए
--- जिन्दगी
पथिक अनजाना
सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना के नाम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते हैं की कुछ रचनायें इस संग्रह में संग्रहित हैं विचार किसी की भर्त्सना उपहास नही हैं https://pathicaanjana777.blogspot.com
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