अपनी समस्या को तुम समूह हास्य न बनाओ
इसे तुम अपने जीवन की अमावस्या न बताओ
जिओ ऐसेजैसे अस्तित्व समस्या का था ही नही
राह किनारे दिक्कतें व्यवहार कब न तुमने सहे
दुनियायी खेल को दिमाग से न कि दिल से यहाँ
जिओ दिल से यहाँ तुम कभी दिमाग से न जियो
भविष्य कीचिन्ता न हावी होने दो अतीत खोने दो
रे बाँवरे अगली पिछली सांस हाथ नही वश हैं तेरे
देखा न स्वर्ग नरक जीवन में हैं मौजूदगी के फेरे
ब्लाग -- राह –ए --- जिन्दगी
पथिक अनजाना
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